पश्चिम बंगाल में आंखों की देखभाल के साथ रोजगार और महिला सशक्तिकरण पर जोर

पश्चिम बंगाल में आंखों की देखभाल के साथ रोजगार और महिला सशक्तिकरण पर जोर

कोलकाता, 28 अगस्त 2026

पश्चिम बंगाल में आंखों की देखभाल को अस्पतालों की सीमाओं से बाहर ले जाने और इसे स्थानीय रोजगार, महिला सशक्तिकरण तथा तकनीक से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है।

Susrut Eye Foundation & Research Centre और Orbis International ने साझेदारी की है। इस साझेदारी का उद्देश्य समुदायों तक गुणवत्तापूर्ण नेत्र चिकित्सा पहुंचाने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वास्थ्य सेवाओं का मजबूत नेटवर्क तैयार करना है।

सुस्रुत के अनुसार, पश्चिम बंगाल के 10 जिलों में 102 विज़न सेंटर संचालित किए जा रहे हैं। इन केंद्रों के जरिए लगभग 57 लाख लोगों की प्राथमिक नेत्र चिकित्सा जरूरतों को कवर किया जा रहा है। हर साल इन विज़न सेंटरों के नेटवर्क से 3 लाख से ज्यादा मरीज सेवाएं लेते हैं।

साल 2026 में अब तक नेटवर्क के जरिए 3,600 से अधिक विज़न कैंप आयोजित किए गए हैं, जबकि हर साल करीब 19,704 रेफरल सर्जरी की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।

इस मॉडल की खास बात यह है कि विज़न सेंटरों को सिर्फ स्वास्थ्य सेवा केंद्र नहीं, बल्कि स्थानीय स्तर पर संचालित माइक्रो-एंटरप्राइज के रूप में विकसित किया जा रहा है।

सुस्रुत ने वर्ष 2025-26 में 140 विज़न केयर तकनीकी कर्मियों को स्थानीय माइक्रो-उद्यमी के तौर पर प्रशिक्षित किया। इनमें 92 प्रतिशत लोग उन्हीं समुदायों से हैं, जहां वे सेवाएं दे रहे हैं, जबकि 63 प्रतिशत महिलाएं हैं।

महिलाओं की भागीदारी को इस पहल का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। प्रशिक्षित महिला विज़न सेंटर मैनेजर अपने समुदाय में लोगों को आंखों की बीमारी के प्रति जागरूक करने, समय पर जांच कराने, जरूरत पड़ने पर अस्पताल तक रेफर करने और इलाज के दौरान मरीजों की मदद करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। इसके साथ ही उन्हें रोजगार और पेशेवर कौशल विकसित करने का अवसर भी मिलता है।

सुस्रुत के मुताबिक, वर्ष 2025-26 में उसके नेटवर्क के माध्यम से 85 हजार से अधिक सर्जरी की गईं। संस्था का कहना है कि इलाज की प्रक्रिया अक्सर अस्पताल पहुंचने से काफी पहले शुरू हो जाती है—जागरूकता अभियान, स्वास्थ्य शिविर और स्थानीय विज़न सेंटर इसके महत्वपूर्ण हिस्से हैं।

अब Orbis International के साथ साझेदारी के जरिए तकनीक आधारित नेत्र चिकित्सा को और मजबूत करने की दिशा में काम किया जाएगा। इसमें डिजिटल तकनीक, कनेक्टेड डायग्नोस्टिक्स, टेली-ऑफ्थैल्मोलॉजी, रिमोट कंसल्टेशन और डेटा आधारित रेफरल सिस्टम जैसी सुविधाओं को विज़न सेंटर नेटवर्क से जोड़ने पर जोर दिया जाएगा।

पश्चिम बंगाल जैसे भौगोलिक रूप से विविध राज्य में तकनीक के जरिए विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवाओं को दूर-दराज के लोगों तक पहुंचाना आसान हो सकता है।

इस पहल में आंखों की बीमारी को सिर्फ स्वास्थ्य समस्या के रूप में नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण, रोजगार और सामाजिक विकास से जुड़ी चुनौती के रूप में भी देखा जा रहा है।

सुस्रुत और ऑर्बिस का लक्ष्य एक ऐसा मॉडल तैयार करना है, जिसमें स्वास्थ्य सेवा, तकनीक और स्थानीय रोजगार एक-दूसरे को मजबूत करें और समुदायों को लंबे समय तक बेहतर नेत्र चिकित्सा उपलब्ध हो सके।


सुस्रुत की बैठक में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. शारद्वत मुखर्जी भी हुए शामिल

कोलकाता में आज आयोजित सुस्रुत आई फाउंडेशन एंड रिसर्च सेंटर की बैठक में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. शारद्वत मुखर्जी भी शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने नेत्र चिकित्सा, स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और समुदाय स्तर पर बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर अपनी बात रखी।

बैठक में सुस्रुत आई फाउंडेशन एंड रिसर्च सेंटर और Orbis International के बीच साझेदारी के तहत आंखों की देखभाल को अस्पतालों से आगे समुदायों तक पहुंचाने, तकनीक के इस्तेमाल और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाने पर चर्चा हुई।

डॉ. शारद्वत मुखर्जी ने भी इस पहल को लेकर अपने विचार साझा किए और नेत्र स्वास्थ्य के क्षेत्र में समुदाय आधारित सेवाओं की अहमियत पर जोर दिया।


( न्यूज़ यूनिक इंडिया )




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