हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी नोआपाड़ा थाना परिसर में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई।
हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी नोआपाड़ा थाना परिसर में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई।
नोआपाड़ा थाना, श्यामनगर—यह वही ऐतिहासिक स्थल है जहाँ वर्ष 1931 में स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस को ब्रिटिश हुकूमत द्वारा गिरफ़्तार कर कुछ घंटों के लिए हिरासत में रखा गया था।
गंगा नदी के पूर्वी तट पर स्थित नोआपाड़ा पुलिस स्टेशन हर साल 23 जनवरी को खास बन जाता है, क्योंकि इसी स्थान का नेताजी सुभाष चंद्र बोस के स्वतंत्रता संग्राम से ऐतिहासिक जुड़ाव रहा है।
इतिहास के अनुसार, 11 अक्टूबर 1931 को शाम करीब 5 बजे, नेताजी सुभाष चंद्र बोस को श्यामनगर स्थित चौरंगी कालीबाड़ी के पास एक सड़क चौराहे से ब्रिटिश पुलिस ने गिरफ्तार किया था। वे उस समय जगद्दल ‘गोलघर’ में बंगाल के जूट मिल मज़दूरों की समस्याओं पर आयोजित एक सम्मेलन में शामिल होने जा रहे थे।
गिरफ्तारी के बाद नेताजी को नोआपाड़ा पुलिस स्टेशन लाया गया, जहाँ उन्हें इसी कक्ष में कुछ घंटों तक बंद रखा गया था, जिसकी तस्वीर आज भी मौजूद है।
श्यामनगर निवासी त्रिनवो सूर बताते हैं कि गिरफ्तारी के दौरान नेताजी ने अंग्रेज अधिकारियों द्वारा दिया गया भोजन लेने से इनकार कर दिया था और उपवास पर रहे। उस समय उनके दादा स्वर्गीय सुशील कुमार सूर, जो तब एक बालक थे और नेताजी के प्रशंसक थे, उन्होंने नेताजी को एक कप चाय भेंट की थी।
वह चाय का कप और तश्तरी आज भी सूर परिवार के घर में एक अमूल्य धरोहर और गर्व की स्मृति के रूप में सुरक्षित है।
हर वर्ष नेताजी की जयंती के अवसर पर नोआपाड़ा पुलिस स्टेशन एक दिन के लिए यह कप-तश्तरी सूर परिवार से लेकर आम जनता के दर्शन हेतु प्रदर्शित करता है, ताकि लोग इस ऐतिहासिक पल से रूबरू हो सकें।
इस आयोजन के माध्यम से नेताजी सुभाष चंद्र बोस के संघर्ष, त्याग और राष्ट्रप्रेम को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

























































































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